प्रकृती के सुकुमार कवी – सुमित्रानंदन पंत

#दिवाळी_अंक_२०१८ प्रथम रश्मि का आना रंगिणी तूने कैसे पहचाना? कहाँ, कहाँ हे बाल विहंगिन्नि पाया, तूने यह गाना? सोई थी तू स्वप्न नीड में पंखों के सुख में चिपकार झूम रहे थे, घूम द्वार पर प्रहरी-से जुगनू नाना। पंतांची ही…

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